हम उलझ के ऐसे मोहब्बत का फ़लसफ़ा रह गया, तुझमे ओर ख़ुदा में न कोई फ़ासला रह गया, हम सोचने लगे है तुझे उन नज़रों से, जिनसे तू भी देखे तो देखता रह जाये।।