Saturday, 6 June 2020

कोई ख़ुशबू घर से चली ही जैसे


कोई  ख़ुशबू  है  के  घर से  वो  चली हो जैसे।
पहली  बारिश  की  शुरूआत  हुयी  हो  जैसे।
 
फिर दिल-ए-ख़ुश-फ़हमे को है उमीदें उनकी
उनके  दिल तक  मेरी  आवाज़ गयी हो जैसे।
 
हो  भटकती   हुई  राहों  में   मुसाफ़िर  तन्हा
उसको मंज़िल से सदा ख़ुद हि मिली हो जैसे।
 
तन्हा  रातों  में  उन्हें  याद  किया  हो   हमने
तब   ख़बर   टूटते   तारे  ने   कही  हो  जैसे।
 
ढूँढते फिरते हों परियों की सि महफ़िल में हम
दफ़’अतन उनकी नज़र मुझसे मिली हो जैसे। 
 
जिंदगी भर का सफ़र इक है तसव्वुर जिसका
वो  ख़ुशी आ के  हक़ीक़त में  मिली  हो जैसे।
 
ख़ुशगवारी  का  ये  एहसास  है  दिल  में  मेरे
उनकी  ‘बेताब’  ग़ज़ल  कोई  हुयी  हो  जैसे।