मिलेंगे हम यह वादा है,
रोज रात को चांद के जरिए...
मैं भेजूंगी पैगाम तुम्हें,
इस बहती हुई हवा के जरिए ...
साथ रहेंगे सोच में दोनों , नाजुक नाजुक यादों में...
मैं कहूंगी .. मुझको, एक मिला था पागल
जिसने जिंदगी सिखाई थी...
तुम कहना सबसे,
एक ज़िद्दी पड़ोसन घर मेरे आई थी...
चलो बहुत हुआ, अब चुप रहूंगी, चुप्पी में मजलूम बहुत है...
तुम जैसा बनना, कहूंगी सबको बस इतना ही मेरा वादा है....
इससे ज्यादा कहूंगी कुछ तो फूट पड़ेगी रुलाई भी....
लोग लड़ते हैं मिलने की खातिर,
अपनी तो बिछड़ जाने की लड़ाई थी....
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