लोग लड़ते हैं मिलने की खातिर,
अपनी तो बिछड़ जाने की लड़ाई थी...
तुम पंछी थे,और मैं थी मछली, हम दोनों की अलग थी दुनिया, अलग जहां ओर अलग जुबां,
सब कहते थे,
हम दोनों का इस दुनिया में मेल कहां...
पर भूल नहीं पाऊंगी वह लम्हा,
जब तुमने दिल की धड़कन सुनाई थी...
लोग लड़ते हैं मिलने की खातिर, अपनी तो बिछड़ जाने की लड़ाई थी...
ये बिछड़ना मिलना ही तो शायद मोहब्बत है,
अपने प्यार को वो दे देना जिसकी उसे जरूरत है...
हम दोनों थे कैद कहीं,
अपनी समझ की सलाखों में... तुमने ऐसा रिहा किया ,
खुद आजादी भी शरमाई थी...
लोग लड़ते हैं मिलने की खातिर, अपनी तो बिछड़ जाने की लड़ाई थी...
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