काश की लम्हे भर के लिये रुक जाये ज़मीं की गर्दिशें,
और कोई आवाज़ ना हो तेरी धड़कनों के सिवा...
मेरी तन्हाई का रंग भी बदल सा गया है तेरे इंतज़ार में,
डर है, तुम न बदल जाओ...
सुन रहा था तेरे होंठों से निकले अल्फाजों को,
की मेरे होंठ, मेरी आँखें मझसे ही झगड़ने लगी।
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